What is laynig Underground cables in hindi

 नम्‍स्‍कार दोस्‍तो केसै हो आप  आज हम बात कि अंडरग्राउंड केबिल क्‍या है ओर केसै काम मे लिया जाता है


तो दोस्‍तो विद्युत उत्पादन केंद्रों में अल्टरनेटर  को  मुख्‍य स्टेप अप ट्रांसफार्मर से संयोजित करने उद्योगशालाओ को वितरक स्टेप डाउन ट्रांसफार्मर से संयोजित करने तथा अधिक भीड़ भाड़ वाले क्षेत्रों में विद्युत शक्ति के वितरण के लिए  सिरोंपरी लाइन की तुलना मैं भूमिगत लाइन को वरीयता प्रदान  की जाती है यद्यपि यहां एक अधिक लागत वाली एवं कठिनाई से मरम्मत की जा सकने वाली लाइन है फिर भी सुरक्षा की दृष्टि से यहां बहुत उपयोगी लाइन है भूमिगत के केबिल्स कई प्रकार के होते हैं

​भूमिगत भूमिगत केबल की संरचना

​केबल के निम्न भाग है



*  ​कोर [ core  ]

​केेेबिल का वह चालक भाग जिसमें से होकर विद्युत धारा प्रवाहित होती है कोर कहलाती है कोर एलुमिनियम अथवा तांबे के तारों को ऐड कर बनाई जाती है तारों की मोटाई एवं संख्या विद्युत धारा वाहन क्षमता के अनुरूप रखी जाती है सामान्यत की कोर 1 कोर 2 कोर 3कोर तथा 3.4 कोर वाले के  केबिल्स बनाए जाते हैं

* ​अचालक आवरण [ insulation convering ]

​प्रत्येक और के ऊपर कागज कैंब्रिक अथवा वार्निश युक्त कागज का आवरण होता है कैंब्रिक की कई पतें  लपेटी जाती है उच्‍च  श्रेणी के केबल्स मैं अचानक पतो के बीच पेट्रोलियम जेली की परतें भी लगाई जाती है जिससे उसकी अच्छा लगता बढ़ जाती है

* ​धात्विक कवच [ metallic sheath ]

​सभी कोर्स पर एक साथ पुण यह कागज अथवा वार्निश युक्त कागज की मोटी परतें है चढ़ाई जाती है और उसके ऊपर लैंड अथवा लैंड एलाँय की एक पते चढ़ाई जाती हैं यहां धात्विक पते नमी को कोर तक पहुंचाने देती है यहां पते लैंड के स्थान पर एलुमिनियम की भी हो सकती हैं


* ​​बेंडिंग [ Bendding ]

​धात्विक कवच के ऊपर फाइबर तथा कागज से निर्मित पदार्थ अथवा जूट अथवा 

​बेंडिंग कंपाउंड मैं डूबे टाट कि पते चढ़ाई जाती है यहां पते धात्विक पते को यांत्रिक चोटो खरोचो आदि से बनाती हैं

* ​आमेरिंग [ Armouring ]

​यह गैल्‍वेनाइज्‍ड स्टील तार से बना कवच होता है जो केबिल को यांत्रिक चोटो दबाव आदि से सुरक्षित रखता है यह कवच वेंडिंग के ऊपर चढ़ाया जाता है उच्‍च श्रेणी के केबल्स मैं दोहरा कवच भी चढ़ाया जाता है

* ​सर्विंग [Serving ]

​​आमेरिंग की सुरक्षा के लिए फाइबर युक्त पदार्थ अथवा फाइबर कंपाउंड डूबे जूट टॉट की एक अंतिम पते चढ़ाई जाती हैं

* भूमिगत​ केबिल्स का वर्गीकरण

​केबल केबल का वर्गीकरण उसके कार्यकारी वोल्टेज के आधार पर किया जाता है

(1)​ लो वोल्टेज के केबिल 1 kV

(2)​हाई वोल्टेज के केबिल 1 kV से 11kv

(3)​सुपर सुपर वोल्टेज केबिल 11kv 33kv

(4)​एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज केबिल 33kv 66kv

(5)​ऑयल फिल्ड एव गैस प्रेशर केबिल 66kv 132kv तक

(6)​m l केबल्स मिनरल इंसुलेटेड केबिल

(7)​ XLPE केबिल क्रॉस लिक्ड पाॅली एथिलीन केबिल

(8)​PVC केबिल पाॅली विनायल क्लोराइड के केबिल

* ​भूमिगत केबल्स के प्रकार 

​SL केबिल

​इस प्रकार के केबिल मैं प्रत्यक्ष कोर पर चालक पर्थ धात्विक खोल बेंडिंग तथा आमेरिंग की जाती है सभी कोर्स पर संयुक्त रूप से धात्विक खोल लैंड खोल नहीं चढ़ाया जाता है परंतु संयुक्त आमेरिंग अवश्य की जाती है ऐसे केबल्स पर्वतीय क्षेत्रों के लिए उपयुक्त होते हैं

​HSO केबिल

​इस केबिल की आकृति गोल ना होकर त्रिभुजाकार रखी जाती है जिससे इसका वजन एवं उष्मीय प्रतिरोध घट जाती है इसकी संरचना s l केबिल के समान होती है

​PILC केबिल

​यह सामान्य प्रकार का पेपर इंसुलेटेड बेल्टेड प्रकार का केबिल है इसमें आमेरिंग नहीं होती है यह निम्न 250v तथा मध्यम 650v वोल्टेज के लिए उपयुक्त होता है

* ​ऑयल फील्ड गैस प्रेशर केबिल

​इस प्रकार का केबल जिसमें लेड आवरण के अंदर फाइबर जूट पदार्थ के स्थान पर पर ट्रांसफार्मर ऑयल भरा जाता है इसका उपयोग 66 k v से 220 केवी तक किया जाता है इसकी स्थापना करते समय इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि केबल सिरे भली प्रकार सील कर जाए जिससे की केबिल का ऑयल लिक ना हो

* ​पीवीसी केबिल

​ वर्तमान समय मैं यह मैं सर्वाधिक प्रचलित केबिल है और इसका उपयोग 1.1 केवी तक किया जाता है इस केबिल की प्रत्येक कोर को पृथक पीवीसी से इंसुलेट करने के बाद सभी कोर्स को पुन पीवीसी से इंसुलेट किया जाता है इस पते के ऊपर गैल्‍वेनाइज्‍ड स्टील तार से आमेरिंग की जाती है और आमेरिंग के ऊपर पुन पीवीसी पते चढ़ा दी जाती है इसका उपयोग वेदर  प्रूफ तथा अंडर ग्राउंड केबिल के रूप में किया जाता है

* ​ अंडर ग्राउंड केबिल बिछाना 

​अंडरग्राउंड केबल बिछाने के 3 तरीके हैं

​1 सीधे बिछाना

​2 पाइप में बिछाना

​3 सॉलिड विधि से बिछाना

​1 सीधा बिछाना 

​ इसके बिल को सड़क के किनारे अथवा अन्य उपयुक्त भूमि में से 1 मीटर गहरि तथा  5 मीटर चौड़ी खाई खोदी जाती है खाई में 5 सेंटीमीटर मोटी एक रेत की पते बिछाकर उस पर केबल बिछा दिया जाता है केबल के ऊपर 15 सेंटीमीटर मोटी एक रेत की रेत बिछाई जाती है रेत की पते के ऊपर ईट की एक पते बिछाकर शिष्य खाई को मिट्टी से भर दिया जाता है 

2 ​पाइप से बिछाना

​इस में 1 मीटर गहरि  और 0.1 मीटर चौड़ी खाई मैं लोहे अथवा सीमेंट के पाइप बिछाए जाते हैं और केबिल को एक सिरे से पाइप मैं डालकर खींचा जाता है इसी प्रकार एक एक पाइप मैं से केबल को गुजारते जाते हैं खाई को मिट्टी से भरने से पहले पाइप के टुकड़ों को आपस में जोड़ दिया जाता है इसी विधि में केबल बिट्टयूमन कंपाउंड पुणे सुरक्षित रहता है

* ​अंडरग्राउंड केबल मैं दोष एव इन्हें खोजना

​सिरोपरी लाइन के दोष तो लाइन के निरीक्षण से ही पता चल जाता है परंतु अंडर ग्राउंड लाइन के दोष एवं दोष स्थल को खोजना कठिन कार्य है


*​​ अंडरग्राउंड केबल में तीन प्रकार के दोष पैदा होते हैं 

​1 ओपन सर्किट दोष

​2 शार्ट सर्किट दोष

​3 अर्थ दोष

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