डीसी मोटर क्या होती है कैसे काम करती है
दोस्तों इस पोस्ट में हम जानेंगे कि dc motor क्या होती हैं कितने प्रकार कि होती हैं कैसे काम करती है इसके अलावा इस पोस्ट में हम dc motor से जुड़े और भी कुछ महत्वपूर्ण सवालों के ऊपर बात करेंगे
1. डीसी मोटर क्या होती है
2. डीसी मोटर कितने प्रकार की होती है
3. बैक emf क्या होता है
4. डीसी मोटर का उपयोग
5. डीसी मोटर स्टार्टर्स
6. डीसी मोटर कैसे काम करती है
7 डीसी मोटर के पार्ट्स
डीसी मोटर क्या है (What is dc motor)
DC मोटर क्या है तो डीसी मोटर डायरेक्ट करंट पर चलने वाला मोटर है यह जैसा कि सबको पता है मोटर का काम इलेक्ट्रिक पावर(electric power) को मैकेनिकल पावर(mechanical power) में कन्वर्ट करना होता है दोस्तों डीसी मोटर का बहुत बड़े स्तर पर प्रयोग नहीं होता है लेकिन इसका प्रयोग बहुत महत्वपूर्ण जगहों पर भी किया जाता है इसका प्रयोग उस स्थानों पर किया जाता है जहां पर ज्यादा बल आघूर्ण (torque) की जरूरत होती है क्योंकि इसका स्पीड(speed) और बल आघूर्ण(torque) के बीच का संबंध एक एसी मोटर (AC Motor) से काफी अच्छा होता है डीसी मोटर का उपयोग सामान्यत स्टील मिल खदानों और सबसे महत्वपूर्ण इलेक्ट्रिक ट्रेन (electric train) में किया जाता है
डीसी मोटर मुख्यत दो प्रकार की होती हैं एक वह जिसके द्वारा वैद्युतिक ऊर्जा को यान्त्रिक ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है दूसरी वह जिसके द्वारा वैद्युतिक ऊर्जा को यान्त्रिक ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है पहले प्रकार की मशीनें जरनेटर कहलाती हैं और दूसरे प्रकार को मशीनें मोटर कहलाती हैं डी.सी. मोटर्स अत्यन्त महत्वपूर्ण मोटर्स हैं और बहुत से कार्य केवल इन्हीं के द्वारा निष्पादित किए जाते हैं अत इसकी जानकारी अत्यन्त आवश्यक है
डी.सी. मोटर का सिद्धान्त (Principle of D.C. Motor)
डी.सी. मोटर (विद्युत-चुम्बकीय खिचाव के सिद्धान्त पर कार्य करती है इस सिद्धान्त के अनुसार किसी चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित विद्युत चालाक करंट अपना स्वयं का एक चुम्बकीय क्षेत्र स्थापित करता है और एक ही स्थान पर कार्य करता है इन दो चुम्बकीय क्षेत्रों की आपस में प्रतिक्रिया के फलस्वरूप चालक में एक घुमाव बल (torque) पैदा हो जाता है
डीसी मोटर के मुख्य पार्ट्स (dc motor parts)
1. चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic field)
2. आर्मेचर (Armature)
3. कम्यूटेटर तथा ब्रश (Commutator, Brush)
4. स्टेटर (Stator )
5. वाइंडिंग (Motor Winding
स्टेटर (Stator)
मोटर के बाहरी भाग को स्टेटर (Stator) कहा जाता है यह मोटर का स्थिर भाग होता है तथा दो या अधिक चुम्बकीय पोल होते है मोटर के इसी भाग से चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न किया जाता है
रोटर (Rotor)
मोटर का आंतरिक भाग जो घूमता है रोटर (Rotor) कहलाता है यह आर्मेचर वाइंडिंग (Armature Winding) से बना होता है जो कम्यूटेटर (Commutator) के माध्यम से बाहरी सर्किट से जुड़ा होता है स्टेटर (Stator) के समान रोटर (Rotor) भी फेरोमैग्नेटिक पदार्थों से बना है
वाइंडिंग (Motor Winding)
वाइंडिंग ( Winding) में तांबे से बने कॉइल की series connection या parallel connection कनेक्शन होते हैं वे दो प्रकार के होते हैं
1. आर्मेचर वाइंडिंग (Armature Winding)
2. फील्ड वाइंडिंग (Field Winding
आर्मेचर वाइंडिंग (Armature Winding)
कई Coils आर्मेचर वाइंडिंग (Armature Winding) बनाने के लिए सीरीज में जुड़े हुए हैं जिसमें हम वोल्टेज देते है
फील्ड वाइंडिंग (Field Winding)
फील्ड वाइंडिंग कॉइल्स का एक समूह है जो डीसी विद्युत् धारा के माध्यम से मुख्य फ़ील्ड फ्लक्स अर्थात चुम्बकीय क्षेत्र का उत्पन्न करता है
कम्यूटेटर (Commutator)
एक कम्यूटेटर (Commutator) एक स्विच के रूप में कार्य करता है जो रोटर (Rotor) और बाहरी सर्किट के बीच करंट की दिशा में परिवर्तन करता है
डी.सी. मोटर के प्रकार (type of D.C. Motors)
डी.सी. मोटर्स मुख्यत निम्न तीन प्रकार की होती हैं
1. सीरीज मोटर (Series motor)
2. शंट मोटर (Shunt motor) तथा
3. कम्पाउण्ड मोटर (Compound motor) इनमें कम्पाउड मोटर्स पुनः निम्न दो प्रकार की होती हैं
(i) क्यूम्युलेटिव कम्पाउण्ड मोटर (Cumulative compound motor)
(a) लाँग शंट तथा (b) शॉर्ट शंट
(ii) डिफरैन्शियल कम्पाउण्ड मोटर (Differential compound motor)
(a) लाँग शंट तथा (b) शॉर्ट शंट
सीरीज मोटर (Series Motor)
सीरीज मोटर में फील्ड वाइण्डिग आर्मेचर के कनेक्शन series connection मे होते है नीचे डायग्राम में दिए गए हैं इस मोटर में पूरी आर्मेचर-करंट फील्ड-वाइण्डिग में से होकर प्रवाहित होती है अतः वह मोटे तार तथा कम लपेटों वाली बनाई जाती है सीरीज मोटर में लोड-धारा
सीरीज मोटर उपयोग (Use of series motor)
सीरीज मोटर का उपयोग ऐसे कार्यों के लिए किया जाता है जिनमें उच्च स्टार्टिंग टॉर्क आवश्यक होता है जैसे- ट्रैक्शन कार्य, क्रेन, भारी निर्माण कार्य में प्रयुक्त होने वाले ट्रक, होएस्ट (hoist) आदि
शंट मोटर (Shunt Motor)
शंट मोटर में फील्ड-वाइण्डिग आर्मेचर तथा सप्लाई-स्रोत के समानान्तर क्रम में कनेक्शन होते हैं अतः फील्ड-धारा और परिणामतः फील्ड-फ्लक्स का मान लगभग स्थिर रहता है शंट मोटर की फील्ड-वाइण्डिग पतले तार तथा अधिक लपेटों वाली बनायी जाती है शंट मोटर में
शंट मोटर उपयोग (use of Shunt Motor)
शंट मोटर का उपयोग कम लोड वाली मशीनों को स्थिर गति पर चलाने के लिए किया जाता है जैसे-लकड़ी का रन्दा, गोलीय-आरो (circulasow), ग्राइण्डर, पॉलिशर, ब्लोअर, मोटर-जनरेटर सैट छपाई मशीन आदि
कम्पाउण्ड मोटर (Compound Motor)
जिस डी.सी. मोटर में दो प्रकार की फील्ड-वाइण्डिग्स अर्थात् सीरीज तथा शंट फील्ड-वाइण्डिग्स प्रयोग की जाती है वह कम्पाउण्ड मोटर कहलाती है एक डी.सी. कम्पाउण्ड मशीन को मोटर अथवा जनरेटर की तरह प्रयोग किया जा सकता है
कम्पाउण्ड मोटर मुख्यत दो प्रकार की होती हैं
1. क्यूम्युलेटिव कम्पाउण्ड मोटर तथा
2. डिफरैन्शियल कम्पाउण्ड मोटर
क्यूम्युलेटिव कम्पाउण्ड मोटर (Cumulative Compound Motor)
जब किसी कम्पाउण्ड मोटर की सीरीज तथा शंट फील्ड वाइण्डिग को इस प्रकार connection किया गया हो कि उसके द्वारा पैदा किए गए चुम्बकीय क्षेत्र एक-दूसरे के साथ सहयोग करने वाले हों तो वह क्युम्प्लेटिव कम्पाउण्ड मोटर कहलाती है
ये मोटस निम्न दो प्रकार की होती हैं
लॉग-शंट, तथा शॉर्ट-शंट चित्र डायग्राम में दिए गए हैं
उपयोग क्यूम्युलेटिव कम्पाउण्ड मोटर
क्यूम्युलेटिव कम्पाउण्ड मोटर ऐसी मशीनों को चलाने के लिए प्रयोग की जाती है जिन्हें स्थिर गति पर चलाना कठिन हो और जिसका लोड परिवर्तित होता रहता हो जैसे—प्रैस रोलिंग मशीन, कम्प्रेसर, एलीवेटर आदि
डिफरैन्शियल कम्पाउण्ड मोटर (Differential Compound Motor)
जब किसी कम्पाउण्ड मोटर की सीरीज तथा शंट फील्ड वाइण्डिग को इस प्रकार connection किया गया हो कि उनके द्वारा पैदा किए चुम्बकीय क्षेत्र एक-दूसरे के विपरीत कार्य करने वाले हों तो वह डिफरैन्शियल कम्पाउण्ड मोटर कहलाती है ये मोटर्स इन दो प्रकार की होती है लाँग-शंट तथा शॉर्ट-शंट
क्योंकि डिफरैन्शियल मोटर में सीरीज-फील्ड-फ्लक्स शंट फील्ड-फ्लक्स के विपरीत दिशा में कार्य करता है अत इस मोटर को स्टार्ट करने में कुछ कठिनाई पैदा होती है इस कठिनाई को दूर करने के लिए स्टार्टिंग के समय सीरीज-फील्ड को शॉर्ट सर्किट' कर दिया जाता है और मोटर के स्टार्ट हो जाने के बाद उसे सर्किट में कनेक्शन कर दिया जाता है
उपयोग डिफरैन्शियल कम्पाउण्ड मोटर
यह मोटर ओवरलोड स्थिति में अपने अस्थिर व्यवहार के कारण सामान्यत प्रयोग नहीं की जाती है अत इसका उपयोग केवल ऐसे कार्यों के लिए किया जाता है जिनमें पूर्ण-लोड का मान नियत रहता है जैसे—बैट्री चार्जिंग सैट बूस्टर आदि
डी.सी. मोटर स्टार्टर्स (DC motor Starter)
दोस्तों हम मोटर में स्टार्टर का इस्तेमाल क्यों करते हैं और स्टार्टर का काम क्या होता है अब मोटर AC हो या DC दोनों में ही स्टार्टर की जरूरत होती है सबसे पहले हम कुछ पॉइंट्स देख लेते हैं जिनसे पता लगेगा कि हमें स्टार्टर की जरूरत क्यों पड़ती है जब भी इंडक्शन मोटर को चालू किया जाता है तो मोटर उसकी रेटिंग का 3 से 5 गुना ज्यादा तक करंट लेती है अब अगर इतना ज्यादा करंट किसी भी मोटर को सीधा ही दिया जाये तो उसकी वाइंडिंग जल सकती है तो इसी स्टार्टिंग करंट को कम करने के लिए स्टार्टर का उपयोग किया जाता है
Types of dc motor Starter
डी.सी. मोटर स्टार्टर्स निम्न तीन प्रकार के होते हैं
1. दो-बिन्दु वाला स्टार्टर (Two-point Starter)
2. तीन बिन्दु वाला स्टार्टर (Three-point Starter)
3. चार-बिन्दु वाला स्टार्टर (Four-point Starter)
दोस्तों आशा करता हूँ आपको Dc motor के सारे सवाल का जवाब मिल गया होगा
यदि फिर भी आपके मन में कोई सवाल हो या कोई confusion हो तो कमेंट करके जरूर बताये
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